पानी नहीं अफसरों के लिए नोट उगले ठूंठ टंकियों ने

प्रचंड गर्मी में जहां दक्षिण क्षेत्र के लोग प्यास बुझाने को बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। वहीं जल निगम द्वारा करोड़ों की लागत से बनाई गई पानी की टंकियां ठूंठ बनी प्यासों को मुंह चिढ़ा रही है। निर्माण में लापरवाही से अधिकांश टंकियां लीक हो गईं। कई जगह विभाग ने फिर से दूसरी टंकी का निर्माण कराया, लेकिन उनकी भी स्थिति जस की तस रही। इन टंकियों ने पानी नहीं नोट उगले लेकिन सिर्फ सरकारी अफसरों के लिए। पानी का संकट तो जस का तस ही बना है।
पानी नहीं अफसरों के लिए नोट उगले ठूंठ टंकियों नेनौबस्ता बसंत विहार पानी की टंकी: बसंत विहार में वर्ष 2010 में केडीए ने करीब 1.70 करोड़ की लागत से पार्क में पांच लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनवाई थी जिसमें कभी भी पानी नहीं चढ़ाया गया। यहां बीते पांच सालों से नलकूप चलाकर जलापूर्ति की जाती है। बिजली न आने पर पानी के लिए लोगों को इधर उधर भटकना पड़ता है। टंकी में यदि पानी भर कर आपूर्ति की जाती तो समय पर बिजली न होने पर भी क्षेत्रीय लोगों को पानी मिल सकता।
र्रही जरौली फेस वन पानी की टंकी: वर्ष 2002 में करीब 2 करोड़ की लागत से केडीए ने पार्क में दस लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनवाई थी। जो एक साल भी सही सलामत नहीं आपूर्ति नही दे सकी। कुछ दिनों के बाद यह टंकी कई जगह से लीक हो गई। साथ ही बोर म ं खराबी होने से क्षेत्र में आपूर्ति बाधित हो गई। जिससे क्षेत्र में पानी संकट की स्थिति है। जलनिगम ने बोर की मरम्मत कराई और सीधे जलापूर्ति की जाने लगी।
बर्रा विश्व बैंक सेक्टर के पानी की टंकी: यहां भी पार्क में बीते 35 साल से लीकेज पानी टंकी खड़ी है। 2009 में फिर से जल निगम ने पांच लाख लीटर क्षमता की दूसरी टंकी का निर्माण शुरू करा दिया। जो 2013 में पूरा भी हो गया लेकिन आज तक इस टंकी से क्षेत्र के लोगों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ। यहां के लोगों को हैंडपंप व सबमर्सिबल का ही सहारा लेना पड़ता है।
बर्रा विश्वबैंक सेक्टर डी पानी की टंकी: यहां पार्क में केडीए ने 10 लाख लीटर क्षमता की टंकी बनवाई थी। टंकी बने 35 वर्ष गुजर गए, लेकिन टंकी लीक होने से आज तक इसमें पानी नहीं भरा जा सका वहीं 2011 से 2013 के बीच जल निगम ने इसी पार्क में एक और 377.79 लाख की लागत से पांच लाख लीटर क्षमता की पीली टंकी बनवाई, लेकिन यह भी लीक हो गई।
अर्रा बिनगवां की पानी की टंकी: वर्ष 1995 में करीब 1.30 करोड़ की लागत से बनी पांच लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी यहां भी सफेद हाथी बनी लोगों को मुंह चिढ़ा रही है। कुछ दिनों तक यहां का बोर खराब होने से कई सालों तक जलापूर्ति ठप रही। इसके बाद जल निगम ने बोर सही कराकर सीधे बोर से जलापूर्ति की जाने लगी।
बिधनू न्यूरी गांव की पानी की टंकी: 2003-04 में एक करोड़ रुपये की लागत से साढ़े तीन लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी बनवाई गई थी। जिससे क्षेत्र के एक दर्जन गांव को जलापूर्ति की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद भी यह टंकी आज तक नहीं चल सकी। यहां की मोटर पाइप चोर चुरा ले गए। इस टंकी से क्षेत्रीय लोगों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हुआ।
यहां भी ठूंठ बनी पानी की टंकियां: बर्रा- 5, आवास विकास, नौबस्ता, हंसपुर सेक्टर ए, बी, सी, मछरिया, यशोदानगर, खाड़ेपुर, परसौली, मझावन, कठारा, बाबूपुरवा, स्वर्ण जयंती विहार, कुरियां।

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