घाटमपुर:तिरहर में औषधीय खेती की धूम

घाटमपुर

विकासखंड के यमुना की तलहटी से जुड़े तिरहर गांव में अधिकांश खेती अभी भी एक फसली और वर्षा पर आधारित है। यहां के किसान कई वर्ष से सूखा और अतिवृष्टि के चलते भुखमरी की कगार पर है। गांव कमंडलपुर के किसान परंपरागत खेती से हटकर साथियों को औषधीय खेती की राह दिखा रहे हैं। गांव के 20 किसानों ने 20 एकड़ क्षेत्रफल में ही कोलियस (पत्थरचूर) के पौधे रोपे हैं।

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राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण बैंक (नाबार्ड) ने मदद को हाथ बढ़ाया, तो औषधीय खेती के सूत्रधार बन आगे आए अर्पित ग्रामीण विकास संस्थान, किरांव के निदेशक डा. शिवलाल सिंह। कृषि सलाहकार सतीश आर सूबेदार की तकनीकी मदद पर गांव के राम स्वरूप, कल्लू, विमल, यशवंत, विश्वनाथ, बलवंत, भुइयादीन, श्रीराम, आशाराम, भूप नारायण व रघुवीर समेत बीस किसानों ने एक-एक एकड़ पर कोलियस के पौधे रोपे हैं।

तीन माह में फसल, सालाना दो-ढाई लाख आमदनी : तकनीकी सलाहकार सूबेदार बताते हैं कि प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये लागत आती है। तीन माह में तैयार होने वाली कोलियस की फसल की वर्ष से तीन बार पैदावार ली जा सकती है। एक एकड़ फसल में करीब एक हजार किग्रा कोलियस की सूखी जड़ें तैयार होती हैं। जिनका बाजार भाव 100 से 120 रुपये प्रति किग्रा है। किसान वर्ष में तीन फसलें लेकर खर्चे निकालने के बाद दो से ढाई लाख की आमदनी कर सकते हैं। जैविक विधि से तैयार होने वाली इस फसल में रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों का कतई प्रयोग नही होता और जंगली जानवर भी इसको नुकसान नही पहुंचाते।

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कोलियस की जड़ों में पाया जाता फोर्स कोलीन : कोलियस फोर्स कोलाई पौधे के अंदर पत्थर को गलाकर खत्म कर देने की क्षमता होती है इसलिए इसे पत्थरचूर, पाषाणभेद व पथरचट नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में होता है। कोलियस एक नया औषधीय पौधा है। इसका उल्लेख प्राचीन चरक संहिता में तो नही है लेकिन वैज्ञानिक शोधों के आधार पर इसकी उपयोगिता वर्तमान में सिद्ध हो चुकी है। पौधे की ऊंचाई दो से पांच फीट होती है। जो देखने में अजवाइन के पौधे से मिलता जुलता होता है। इसकी जड़ों में फोर्स कोलीन नामक तत्व पाया जाता है, जिसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। बढ़ती मांग को देखकर फिलहाल इसकी खेती तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में कई वर्ष से की जा रही है।

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इन रोगों के उपचार को बनती दवाएं : पथरी व हृदय रोग के साथ कोलियस से इंजाइमा, हाइपरटेंशन, अस्थमा, एलर्जी, लघुशंका आदि संबंधी बीमारियां, चर्म रोग, उच्च रक्तचाप के उपचार को औषधियों का निर्माण होता है। सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. वीके गुप्ता कहते हैं कि कोलियस में व्यक्ति के शरीर में संग्रहीत वसा को तोड़ने की भी क्षमता मौजूद है, मोटापा से निजात दिलाने वाली औषधियों में भी प्रयोग किया जाता है।

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