महिला स्वास्थ्य की ओर कानपुर का एक और कदम, सेनेटरी नैपकिन का लगाया जाएगा कारखाना

कानपुर :16 जुलाई शुक्रवार था। दोपहर का एक बजने को था। सीएसजेएमयू सभागार महिलाओं और लड़कियों से खचाखच भरा था। कन्या शिक्षा और सुरक्षा को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और हिन्दुस्तान की पहल पर चर्चा हो रही थी। तभी माइक संभाला कमिश्नर मोहम्मद इफ्तेखारुद्दीन ने। कन्या शिक्षा-सुरक्षा के बीच अचानक उन्होंने ऐसा विषय छेड़ दिया, जिससे सभागार में पिन ड्राप साइलेंस छा गया। चंद पलों की खामोशी के बाद फिर एकाएक खुसर-पुसर शुरू हो गई। आखिर ऐसा क्या कहा था मंडलायुक्त ने। असल में कमिश्नर ने कन्या शिक्षा-सुरक्षा के बीच उनके स्वास्थ्य से जुड़े सेनेटरी नैपकिन विषय पर चर्चा छेड़ दी, जिसको लेकर सभागार में सन्नाटा पसरा। सभागार में मौजूद लोगों के लिए असामान्य बात थी लेकिन सवाल मौजूं था। एक गंभीर विषय कमिश्नर के माध्यम से चर्चाओं में आ गया। बकौल आयुक्त, आला प्रशासनिक अफसर भी इस विषय पर चर्चा के दौरान बगलें झांकने लगते हैं। ग्रामीण क्षेत्र तो छोड़िए शहरों में भी हालत शर्म और संकोच के चलते बद से बदतर हैं। अब समय आ गया है महिला स्वास्थ्य की इस जरूरत पर खुलकर बात करने का। न सिर्फ बात करने बल्कि इस दिशा में काम कर जागरूक करने का। शासन की ओर से सेनेटरी पैड्स को एक उद्योग के रूप में स्थापित करने की कवायद भी शहर में शुरू हो गई है।

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