लाखों खर्च, फिर भी जानवर सड़कों पर

कानपुर शहर को स्मार्ट बनाने की तैयारी चल रही है लेकिन आवारा जानवरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए कोई खाका नहीं तैयार किया गया है। नगर निगम के दावे तो बहुत हैं लेकिन हर सड़क और गली पर आवारा जानवरों के झुंड हकीकत उजागर कर रहे हैं। गाय, सांड़, सुअर, कुत्ताें ने लोगों का चलना दूभर कर दिया है तो छतों पर उछलकूद मचाते बंदरों का खौफ भी घरों के अंदर कैद रहने को मजबूर कर रहा है।

कैटल कैचिंग दस्ते पर हर माह वेतन और ईंधन के रूप में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन काम के मामले में दस्ता केवल दिखावा बनकर रह गया है।आवारा जानवर पकड़ने के लिए आउट सोर्सिग से 30 कर्मचारियों का कैटल कैचिंग दस्ता गठित किया गया है। इसके अलावा एक दर्जन और कर्मचारी हैं। इसके बाद भी हर माह 50 से ज्यादा जानवर नहीं पकड़े जाते हैं। पिछले आठ माह से सिर्फ ढाई सौ कुत्ताें का ही बंध्याकरण हो पाया है। हफ्ते में सात से दस तक कुत्ताें का बंध्याकरण चल रहा है। इस हिसाब से शहर में घूम रहे एक लाख से ज्यादा कुत्ताें को पकड़ बंध्याकरण करने में कितना वक्त लगेगा, अंदाजा लगा सकते हैं। बारिश के मौसम में कुत्ताें का आतंक बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बाइक सवारों के साथ होती है जो अक्सर रात में कुत्तों के दौड़ा लेने के कारण दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

dogs1_1453098936सुअर माफियाओं के आगे दस्ता नतमस्तक : सुअर माफियाओं के आगे दस्ता नतमस्तक रहता है। पीएसी मिलने के बाद ही दस्ता पकड़ने जाता है। कई बार दस्ते पर हमला हो चुका है। अगस्त में अभियान चलाकर दस्ते ने सिर्फ 62 सुअर पकड़े थे। इस दौरान लगभग छह लाख रुपये खर्च भी किए गए।

यहां कुत्ताें से लगता डर : मरियमपुर, फजलगंज, दर्शनपुरवा, राजापुरवा, रामबाग, जवाहर नगर, छपेड़ा पुलिया, बाबूपुरवा उत्तर और दक्षिण के दो दर्जन इलाकों में कुत्ताें का झुंड सड़कों पर घूमता रहता है।

यहां सुअरों का डेरा : जवाहर नगर, विजय नगर, शास्त्रीनगर, स्वरूप नगर, आर्यनगर बेनाझाबर, अशोक नगर, दर्शनपुरवा, जाजमऊ, श्याम नगर, गांधीनगर, रामबाग, ब्रrानगर, नेहरू नगर, उस्मानपुर कालोनी, बाबूपुरवा क्षेत्र हैं।

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