कानपुर – डॉक्टरों के लिए पहेली बना विचित्र बुखार

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डेंगू का सच बर्दाश्त नहीं उर्सला से भगाया मरीज:

अगस्त से लेकर अब तक शहर के सरकारी से लेकर निजी अस्पताल भले डेंगू के मरीजों से पटे चले आ रहे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को ये नहीं दिखे। उलटा विभाग जिले में डेंगू के कहर को ही शुरू से नकारता रहा है। अब विभाग ने इसे साबित करने के लिए अलग ही हथकंडा अपना डाला है। डेंगू की जांच रिपोर्ट पर पहरा बैठाने के बाद अब जिला सरकारी अस्पताल उर्सला से डेंगू के मरीज ही भगाए जाने लगे हैं। उर्सला के डेंगू वार्ड में इस समय एक भी मरीज भर्ती नहीं। दो दिन पहले एक मरीज आया तो डेंगू की जानकारी होते ही उसे वहां से भगा दिया गया। उसे हैलट ने भर्ती कर लिया है। 1सिविल लाइंस स्थित डीसी लॉ कालेज के पीछे स्थित एक हाता निवासी युवक को कई दिनों से बुखार है। पहले फिजीशियन से इलाज कराता रहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 20 सितंबर को परिजन उसे लेकर उर्सला पहुंचे। वहां पर डॉ. अनिल निगम के देखरेख में भर्ती कराया गया, लेकिन जैसे ही डेंगू का पता चला तो मरीज को आनन-फानन डिस्चार्ज करते हुए हैलट जाने की सलाह दे दी। हैलट के डेंगू वार्ड में भर्ती युवक को गुरुवार को प्लेटलेट्स चढ़ाए गए हैं। उर्सला के सीएमएस डॉ.संजीव कुमार का कहना है कि उर्सला में डेंगू के मरीजों को भर्ती करने के निर्देश हैं। मरीजों को क्यों हैलट भेजा, इसकी जांच कराएंगे।

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