कानपुर को बनाएंगे औद्योगिक हब

361 करोड़ से बनेगा ईएसआई का सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटलकानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था क्योंकि यहां पर टेक्सटाइल मिलें थी। बीआईसी की लाल इमली है, डिफेंस से जुड़े बहुत से कारखाने हैं। प्रदेश सरकार का सहयोग मिले तो केंद्र सरकार की योजना इसे औद्योगिक हब बनाने की है। यह बात केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने पांडुनगर स्थित बीमा अस्पताल परिसर में सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल का शिलान्यास करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम योजना (ईएसआईसी) की शुरुआत यहीं पर 20 फरवरी 1952 को देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने की थी। यहां पर विकलांगों के उपकरण बनाने का एलिम्को जैसा प्रतिष्ठान है। केंद्र सरकार प्रदेश में नए उद्योगों के लिए धन निवेश करने को तैयार है बशर्ते प्रदेश सरकार भूमि दे। उन्होंने कहा कि निगम नए क्षेत्रों में छह बेड की डिस्पेंसरी खोलना चाहती है किंतु इसके लिए प्रदेश सरकार स्थान मुहैया कराए। केंद्र सरकार तीन सौ करोड़ रुपये लगाना चाहती है। इसी तरह प्रदेश के 45 पुरानी डिस्पेंसरी को भी अपग्रेड करने की योजना शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि ईएसआईसी की योजना 5.30 करोड़ भवन निर्माण मजदूरों को भी चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाने की है। उन्होंने श्रमायुक्त से हुई वार्ता का हवाला देते हुए बताया कि भवन सन्निर्माण बोर्ड के पास 2020 करोड़ रुपये का बड़ा फंड है और अभी 350 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। मामूली अंशदान से वह भी दायरे में लाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने से कानपुर ही नहीं प्रदेश के गरीबों को विशिष्ट सेवाएं मिलेंगी। प्रदेश में इन दिनों 15 लाख बीमित और 55 लाख लाभार्थी हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर दो करोड़ बीमित और आठ करोड़ लाभार्थी हैं।

361 करोड़ से बनेगा ईएसआई का सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल

 

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