लाल इमली का सीएमडी राम सिंह ने किया इंस्पेक्शन।600 वर्कर्स की जगी उम्मीद।

कानपुर. केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी के कहने पर बीआईसी के सीएमडी राम सिंह ने गुरूवार और शुक्रवार को लाल इमली का इंस्पेक्शन किया। उसी दौरान उन्होंने 600 वर्कर्स को आश्वासन दिया कि वह दिल्ली जाकर रिपोर्ट मंत्रालय को देंगे।

 lal-imli-inside– लाल इमली कर्मचारी संघ के नेता आशीष पांडेय के मुताबिक़, सीएमडी राम सिंह ने गुरूवार और शुक्रवार को लाल इमली के सुजलर, वेविंग और कम्बल बनाने वाले यूनिट का इंस्पेक्शन किया।
– इसके बाद वह केयरटेकर जीएम राजा मित्रा से भी मिले।
– यहां की मशीनों को देख कर उसके बारे में जानकारी भी ली।
– इस मील का इंस्पेक्शन करने के बाद सीएमडी ने कहा कि सबकुछ ओके है, फिर ये मिल बंद क्यों है ये बात समझ में नहीं आई।
– -उन्होंने कहा कि यहां कुछ रिपेयरिंग करा कर फिर से चलाया जाएगा।
– वर्कर्स को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वो दिल्ली जाकर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप देंगे।
– इसके बाद वह तय करेगे कि कब और कैसे इसे शरू करना है ।
इससे पहले भी हुआ था इंस्पेक्शन
– पिछले साल तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री संतोष गंगवार ने भी लाल इमली का इंस्पेक्शन किया था। उन्होंने भी इस मिल के कंडीशन को बेहतर बताया था।
– गंगवार ने भी यहाँ के कर्मचारियों से ये वादा किया था कि वो इस मिल को जल्द से जल्द चालू करवा कर रहेंगे।
– गंगवार ने भी इस मिल की मशीनों को देख यहाँ के प्रोडक्ट की तारीफ़ की थी। मगर यहाँ से जाने के बाद बात आयी गयी हो गयी।
lal-imli-inside-working-area4000 में से 600 वर्कर्स ही बचे
– इस मील के एडमिनिस्ट्रेटिव राजा मित्रा ने बताया कि लाल इमली मिल में सबकुछ ठीक है।
– हर यूनिट की मशीने चालू अवस्था में है।
– लाल इमली मील अपने पुराने रुवाब में लौट सकती है, बस इसको जरुरत है तो कच्चे माल के साथ रिवाइवल की।
– इनके मुताबिक़, रिवाइवल के लिए 2011 में कांग्रेस शासन काल में परमिशन मिल गई थी, लेकिन फंड न मिलने के कारण सभी यूनिट बंद हो चुकी है।
– साल 2004 के बाद कच्चे माल की सप्लाई भी बंद हो चुकी है।
– यहां प्रोडक्शन नहीं होने के कारण वर्कर्स को पिछले डेढ़ साल से वेतन नहीं दिया गया था।
– जैसे-तैसे सात महीने का वेतन दिया गया है।
– पहले यहां करीब 4 हज़ार वर्कर्स काम करते थे, लेकिन अब सिर्फ 600 ही बचे हैं।
machine-switzerlandस्विट्जर लैंड से भी लाई गई हैं मशीने
– सुजलर विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजिनियर रामधनी यादव ने बताया कि यहां शूटिंग शर्टिंग के फिनिश कपड़ा बनता है।
– इस विभाग की मशीने अगर पूरी क्षमता से चले तो एक दिन में करीब 4500 मीटर कपड़ा निकलता जा सकता है।
– यहां स्विट्जर लैंड से लाई गई चार कम्प्यूटराइज मॉर्डन मशीने है, जिनपर अभीतक कोई काम नहीं हुआ है।
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