व्यवसाय को लगी हजार-पांच सौ की नजर ,ब्रेड की हालत बिगड़ी, बिस्कुट बीमार

1844084537226293718बाजार में नयी करेंसी आने के कारण हालात में हुआ बदलाव शादी वाले घरों की जरूरतों के चलते बाजार में होने लगी है लोगों की भीड़ कपड़ा व सराफा दुकानदार खुश
एक हजार व पांच सौ के नोट बंद होने के बाद से लगातार सन्नाटे की शिकार बाजार का सन्नाटा आखिरकार सहालगी जरूरतों ने तोड़ना शुरू कर दिया है। शनिवार को शहर की तमाम प्रमुख बाजारों में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ग्राहक भी दिखे और दुकानदारों से स्वीकारा भी कि सहालगी बिक्री ने उन्हें सहारा दिया है। बीती 8 नवंबर की रात को हजार व पांच सौ के नोट बंद किये जाने की घोषणा के बाद 9 नवंबर से लगातार बाजार में सन्नाटा छाया था। इसका कारण लोगों के पास कैश की कमी हो जाना ही था। दरअसल जिनके परिवारों में शादी समारोह हैं, नकदी की कमी के कारण उनके हाथ बंध गये थे। जब उन्होंने बैंकों से अपनी रकम बदलवाने का प्रयास किया तो नियम और लंबी लंबी लाइनें आड़े आने लगीं। ऐसे में जब लोगों के हाथ तंग हुए तो उनकी क्रयशक्ति भी कम हुयी और वह नये नोटों के जुगाड़ में व्यस्त हो गये। इन हालात में स्वाभाविक तौर पर बाजार में ग्राहकों की कमी होने के कारण सन्नाटा पसर गया था। खासकर कपड़े, सराफा, किराना और अन्य ऐसी बाजारों में जहां शादी समारोह से सम्बंधित सामान की बिक्री होती है। इधर, बैंकों पर दबाव भी कुछ कम हुआ और लगातार प्रयास के बाद शादी वाले घरों में नये नोटों की व्यवस्था भी हुयी, जिसका परिणाम शनिवार को कपड़े और आभूषणों की दुकानों पर ग्राहकों की आवक के रूप में देखने को भी मिला। किदवईनगर में कपड़े के शोरूम के संचालक सशेन्द्र शुक्ल बताते हैं, बीती 9 नवंबर से लगातार सन्नाटा था, लेकिन शुक्रवार से यह दूर होना शुरू हुआ है। सहालगी मांग बाजार तक पहुंचने लगी है, जिनके घरों में शादी समारोह हैं, वह खरीद करने को निकले हैं। इसी तरह साड़ी का कारोबार करने वाले राजू अग्रवाल ने बताया कि बाजार में आम ग्राहक तो नहीं है, लेकिन शादी विवाह वाले परिवार खरीदारी करने निकलना शुरू हो गये हैं। दुकानदार मान रहे हैं कि एटीएम सही ढंग से काम करने लगें तो बाजारों की रौनक तेजी से बढ़ेगी।

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