क्या वाकई ‘मनोरंजन का बाप’ है आईपीएल?

इंडियन प्रीमियर लीग अपने दसवें पड़ाव पर पहुंच चुका है। लीग के दूसरे सीजन में ही आईपीएल की एक टैगलाइन काफी लोकप्रिय हुई थी..’मनोरंजन का बाप’। इस टैगलाइन के पीछे की वजह थी आईपीएल की मनोरंजन की दुनिया पर कायम होती बादशाहत। टीआरपी से लेकर पब्लिक इंगेजमेंट तक आईपीएल ने टीवी शो, फिल्म सबको पीछे छोड़ दिया। आईपीएल के डेढ़ महीने बाकी मनोरंजन जगत के लिए सूखे की तरह रहते थे। लेकिन सीजन-दर-सीजन बीतने के साथ भी क्या आईपीएल की ये चमक बरकरार है..या कुछ धुंधली पड़ी है? क्या अभी भी लीग शुरू होने के साथ ही बाकी इंटरटेनमेंट सेक्टर का धंधा मंदा पड़ जाता है? क्या आईपीएल अभी भी ‘मनोरंजन का बाप’ है…

शिखर पर ‘क्रिकेट का कर्मयुद्ध’

साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग का आगाज ‘क्रिकेट का कर्मयुद्ध’ की थीम के साथ हुआ। आठ शहरों की आठ टीम। एक ही देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी अब एक-दूसरे के सामने थे। दर्शक इसके लिए रोमांचित थे। ये रोमांच इसलिए भी ज्यादा था, क्योंकि भारत ने कुछ महीने पहले ही टी-20 विश्वकप जीता था। आईपीएल ने ऐसा आगाज किया कि औसत टीआरपी 6-7 के बीच रही। कुछ मैच की टीआरपी सात से भी ऊपर गई, जबकि आईपीएल-2008 फाइनल की टीआरपी दस तक पहुंच गई। चेन्नई, पंजाब, कोलकाता, मुंबई के मैच खासतौर पर हिट रहे।

धीरे-धीरे घटा दबदबा

साल 2008 और 2009 में आईपीएल का दबदबा बरकरार रहा। 2009 में आईपीएल दक्षिण अफ्रीका में हुआ। इसे भी टीवी पर जबरदस्त लोकप्रियता मिली। टीआरपी करीब-करीब पहले सीजन के बराबर ही रही। दिन के मैचों की लोकप्रियता हालांकि कुछ कम हुई, लेकिन रात के मैच बेहत पॉपुलर रहे। जिन टीमों के मैच पहले सीजन में हिट रहे, उनके मैच दूसरे सीजन में भी खूब देखे गए। लेकिन 2010 से आईपीएल का दबदबा कम होने लगा। 2011 में भारत के विश्वकप जीतने के बाद आईपीएल किसी को नहीं भाया। लोग अब तक भारत की जीत की खुमारी में थे। ऐसे में कोई लीग के साथ जुड़ नहीं पाया। आगे भी यही हाल रहा।

फिल्मी पर्दे पर असर

आईपीएल के पहले कुछ सीजन तक ये हाल था कि इन डेढ़ महीनों में कोई बड़ी फिल्म रिलीज नहीं होती थी। 2008 में आईपीएल के साथ टशन, क्रेजी 4 और सरकार राज जैसी बड़ी फिल्में फ्लॉप हुईं। 2009 में आईपीएल के साथ 3 फिल्म रिलीज हुईं, तीनों लो बजट थीं, जो फ्लॉप हुईं। आगे के तीन-चार साल तक आईपीएल के दौरान कोई बिग बजट फिल्म रिलीज ही नहीं होती थी। लेकिन धीरे-धीरे आईपीएल का वर्चस्व घटा और ये ट्रेंड बदला। आलम ये रहा कि 2016 आईपीएल के दौरान शाहरुख खान की फैन जैसी बड़ी फिल्म रिलीज हुई। इसके अलावा बागी, अजहर और सरबजीत भी आईपीएल के साथ ही आईं।

क्या बरकरार है वो खौफ?

दरअसल आईपीएल बेशक अभी भी बीसीसीआई, खिलाड़ियों और लीग से जुड़ी हर संस्था के लिए बेहद मुनाफे का सौदा है। ये लीग अब भी सुपरहिट है, लेकिन पहले की तरह नहीं। पैसा तो आयोजकों से डील, सेटेलाइट राइट्स, विज्ञापन और बाकी तमाम तरीकों से बनाया ही जा रहा है। लेकिन इसकी लोकप्रियता अब पहले की तरह नहीं रही। जिस तरह लोग आईपीएल के लिए कामकाज छोड़ देते थे, बाकी इंटरटेनमेंट सेक्टर का काम ठप हो जाता था, वो बात अब नहीं रही। खिलाड़ी खुद भी इसमें पहले जैसी रुचि नहीं दिखाते।

हाल-ए-टीआरपी

पहले सीजन की टीआरपी लगातार 6 से ऊपर रही। फाइनल, सेमीफाइनल के अलावा मुंबई, चेन्नई, कोलकाता. पंजाब जैसी टीमों के मैच को तो 8,9,10 तक की टीआरपी मिली। 2010 तक ये सिलसिला बरकरार रहा। लेकिन 2011 से टीआरपी लुढ़कने लगी। 2011 में भारत की विश्वकप जीत की खुमारी ने लोगों को आईपीएल से कुछ दूर कर दिया। इसके अलावा 2014 टी-20 विश्वकप में भारत की हार के बाद भी लीग से लोगों का मन हटा। साल 2012-13 में टीआरपी 4-5 तक ही रही। ये टीआरपी बेशक खराब नहीं है, लेकिन शुरुआती सफलता के आगे कमतर ही है। 2014 में रेटिंग 4 तक ही रही। अब हाल ये है कि 2016 में आईपीएल की औसत टीआरपी 4 के करीब ही रही। सीजन में जो मैच सबसे ज्यादा देखे गए, उनकी रेटिंग भी 5.50-6.00 तक ही रही।

घटी दिलचस्पी..क्या है वजह?

सवाल ये है कि आईपीएल कि लोकप्रियता अगर कम हुई है, तो इसकी वजह क्या है? मुख्य तौर पर ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिनकी वजह से आईपीएल अब ‘इंडिया का त्योहार’ नहीं रहा…

  • कुछ भारतीय खिलाड़ियों का लीग में ही आपस में झगड़ना लोगों को नहीं भाया। आफ्टर पार्टी, चीयरगर्ल्स से जुड़े विवाद वगैरह ने लीग को खराब प्रचार भी दिया।
  • आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के सामने आने के बाद इसकी विश्वसनीयता घटी। लोग अब तक आईपीएल मैच को संदिग्ध नजर से ही देखते हैं।
  • क्रिकेट की ओवरडोज दर्शकों को नहीं भा रही। आईपीएल दो साल के अंतर में हो, तो शायद ज्यादा प्रभावी रहे।
  • बड़े खिलाड़ी एक-दो सीजन से आईपीएल से दूर होते दिख रहे हैं। इस बार भी शुरुआती चरण में कई बड़े खिलाड़ी नहीं दिखेंगे।
  • आईपीएल के दौरान खिलाड़ियों का चोटिल होना भी बड़ा कारण है। इसके अलावा ग्लैमर की ओवरडोज भी अब दर्शकों को नहीं भा रही।
  • बिग बैश, कैरिबियन प्रीमियर लीग और पाकिस्तान सुपर लीग जैसी क्रिकेट लीग के आने से भी आईपीएल पर असर पड़ा है।

बहरहाल आईपीएल का दसवां सीजन अब सामने है। उम्मीद है कि ये सीजन कुछ नई प्रतिभाओं को सामने लाने के साथ ही मनोरंजन की भी गारंटी देगा।

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