भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी नुजहत परवीन पहुंचीं आइआइटी

This women called as DHONI in women cricket teams
नुजहत परवीन (फाइल फोटो)
 महिला क्रिकेट टीम में अभी तक लोग सिर्फ अंजुम चोपड़ा, मिताली राज व झूलन गोस्वामी को ही जानते थे, लेकिन सात नंबर की जर्सी पहनकर विकेट के पीछे गेंद को पकड़ने वाली नुजहत परवीन भी इन दिनों सुर्खियों में हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य परवीन रविवार को कानपुर स्थित आईआईटी के एक कार्यक्रम में शामिल हुई। जहां उन्होंने बताया कि पहले वो एथलीट में हाथ आजमाना चाहती थीं और सौ मीटर की रेस में गोल्ड मेडल भी जीता। लेकिन सिंगरौली में एक क्रिकेट प्रतियोगिता हो रही थी। टीम में एक सदस्य की जगह खाली थी। हमारे टीचर ने टीम सिलेक्टर को मेरा नाम सुझाया और उन्होंने मेरा टीम में चयन कर लिया। उस टूर्नामेंट में मैं मैन ऑफ दा सीरीज घोषित की गई और यहीं से एक रेसर ने हाथों मे ग्लव्स पहनकर क्रिकेटर बन बैठीं।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेट-कीपर और युवा खिलाड़ी सिंगरौली (मध्य प्रदेश) की रहने वाली नुजहत परवीन रविवार को आईआईटी काके एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कानपुर आई। परवीन ने इस मौके पर आईआईटी स्टूडेंट्स के साथ मस्ती की और अपनी कामयाबी के किस्से शेयर किए। परवीन ने बताया कि पहले वो एथलीट बनना चाहती थीं और 100 मीटर रेस में जिला स्तर पर गोल्ड मेडल भी जीता। वो इसके लिए मेहनत कर रही थीं और कभी-कभी स्कूली लड़कों के साथ क्रिकेट भी खेला करती थी। हमारे यहां एक क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होना था। सिंगरौली की टीम में एक सदस्य की जगह खाली थी, जो काफी प्रयास के बाद भी भरी नहीं जा सकी थी। जिला एसोसिएशन के सेक्रेटरी विजयानंद जायसवाल ने मुझे कभी स्कूल में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलता देखा था तो उन्होंने टीम में शामिल कर लिया। उस टूर्नामेंट के बाद क्रिकेट ही भविष्य बन गया।
जहां आज के दौर में मुस्लिम समाज में महिलाओं पर अनेक तरह के बंदिशे होती हैं, वहीं परवीन इन सबकी परवाह किए बगैर आगे बढ़ रही हैं। परवीन कहती हैं कि मुस्लिम परिवार से होने के बाद भी मुझे खास बंदिशों का सामना नहीं करना पड़ा। कहा कि मुझे मिताली राज की तरह बनना है। अभी मुझे बैटिंग में दम दिखाना है। पर्याप्त मौके नहीं मिलने के कारण अभी तक इसमें पीछे रही हूं। अब लगातार प्रैक्टिस कर रही हूं। वेस्टर्न रेलवे में कार्यरत नुजहत के पिता मसी आलम में एक कम्पनी में कार्यरत हैं तो मां नसीमा बेगम गृहणी हैं। नुजहत ने बताया कि उसके भाई आमिर ने हमेशा उसकी हौंसला अफजाई की है। नुजहत मुम्बई से अभी स्नातक की पढ़ाई कर रही है।इंटरनेशनल महिला क्रिकेट में विकेट कीपिंग करने वाली नुजहत परवीन महिला क्रिकेट का एमएस धोनी कहा जाने लगा है। महिला क्रिकेटर और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी में काफी समानताएं हैं। छोटे से गांव से निकली नुजहत ने फुटबाल में गोल्ड मेडल हासिल किया।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में नुजहत परवीन (फाइल फोटो)

न चाहते हुए भी क्रिकेट में दस्तक दी। फिर ऐसी कड़ी मेहनत की कि आज वह बेटियों के लिए मिसाल बनी हुई हैं। रेलवे की तरफ से खेलने पर उन्हें भी धोनी की तरह जर्सी नंबर सात मिली जो काफी चर्चा का विषय बनी रही। रविवार को आईआईटी में आयोजित ‘उद्घोष-2017’ के शुभारंभ पर आईं नुजहत ने अपने अनुभव साझा किए।

नुजहत परवीन (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के सिंघौली गांव से निकली नुजहत देश स्तर पर परचम लहरा रही है। वर्ष 2016 से क्रिकेट टीम में पहुंचने वाली महिला खिलाड़ी टीम की कप्तान मिताली राज को अपना आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि गली क्रिकेट खेलती रहती थी लेकिन क्रिकेट से ज्यादा फुटबाल में रुचि थी। फुटबाल में गोल्ड मेडल भी हासिल किया। वर्ष 2011 में जिलास्तरीय क्रिकेट टीम में 11 लड़कियां पूरी न होने पर सेक्रेटरी ने टीम में शामिल होने का अनुरोध किया।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी नुजहत परवीन

वहां शामिल होने के बाद जिला स्तरीय, राज्यस्तरीय और रेलवे के लिए क्रिकेट खेला। चयनकर्ताओं ने वर्ष 2016 में टी-20 के लिए चयनित किया। हाल ही में इंग्लैंड में हुए महिला वर्ल्ड कप का हिस्सा रही यह महिला क्रिकेटर अपनी कामयाबी का श्रेय अपने पिता (मशी आलम), मां (नसीमा बेगम) और स्कूल के सेक्रेटरी विजयानंद को देती हैं। अब वे क्रिकेट के माध्यम से देश का नाम रोशन करना चाहती है। ऐसी ही दास्तां एमएस धोनी की भी है। सिंघौली में इंटरमीडिएट करने के बाद अब वह स्नातक मुंबई यूनिवर्सिटी से कर रही है।
परवीन ने कहा कि वह कानपुर इससे पहले तीन बार आ चुकी है। पहली बार 2011 में कमला क्लब में इंटर स्टेट टूर्नामेंट खेलने आई थी। इस दौरान यूपी की टीम के साथ हमारा मैच था। परवीन कहती हैं कि उस मैच में मैने 80 रन की पारी खेली थी और पाचं छक्के जड़े थे। इसी मैच के बाद मेरे करियर में चार चांद लग गए। परवीन, ने इसके बाद अंडर-19 व अंडर-23 भी खेला है। कहती हैं, ग्लब्स पहनना मुझे बहुत अच्छा लगता है। इसी शौक ने मुझे विकेट-कीपर बना दिया। क्योंकि इसकी टीम में विशेष जगह होती है। बल्लेबाज व गेंदबाज कई होते हैं मगर विकेट-कीपर सिर्फ एक। परवीन ने कहा कि अभी मिस्टर परफेक्ट के बारे में कुछ नहीं सोचा है। अभी तो मुझे मिस परफेक्ट बनना है। फिलहाल पूरा ध्यान क्रिकेट पर है। अपनी विकेट-कीपिंग और बैटिंग में और सुधार लाना है। साथ ही अपनी पिछली गल्तियों को लगातार सुधारने का प्रयास कर रही हूं।
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