हैलट में अब इंफेक्शन से नहीं जाएगी जान

एलएलआर हॉस्पिटल व संबंद्ध अस्पतालों में इंफेक्शन की वजह से हर साल होने वाली दर्जनों मौतों को लेकर अस्पताल प्रशासन की नींद टूटी है. इंफेक्शन के लिहाज से हॉस्पिटल की सबसे सेंसेटिव जगहों पर हर इंफेक्शन के स्तर की हर क्भ् दिन में जांच की जाएगी. इसमें इमरजेंसी, आईसीयू, ओटी, डायलिसिस यूनिट, एनआईसीयू, पीओपी वार्ड, बर्नयूनिट जैसी इंफेक्शन के लिहाज से सेंसेटिव जगहों को शामिल किया गया है. प्रमुख सचिव के आदेश के बाद एक इंफेक्शन कंट्रोल टीम का गठन भी शुक्रवार को कर दिया गया.

– ओटी, आईसीयू, एनआईसीयू में हर 15 दिन में कल्चर जांच के आदेश, शासन को भेजनी होगी इंफेक्शन रेट की रिपोर्ट

-प्रमुख सचिव के आदेश पर इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी का भी गठन, निस्तारण के लिए माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी

-हर साल एलएलआर हैलट हॉस्टिपट व उससे संबद्ध अस्पतालों में दर्जनों मरीजों की इंफेक्शन की वजह से हो जाती है मौत

सेप्टीसीमिया से दर्जनों मौतें
मालूम हो कि हैलट के आईसीयू, बर्नयूनिट और सर्जरी ओटी में स्टेरलाइजेशन की ठीक व्यवस्था नहीं होने की वजह से इंफेक्शन का स्तर काफी ज्यादा रहता है. आईसीयू में भर्ती होने वाले हर दूसरे मरीज को इलाज के कुछ दिनों में ही कई तरह के संक्रमण हो जाते हैं. यही हाल बाल रोग विभाग के एनआईसीयू का भी है, जहां हर वक्त क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चे भर्ती रहने से इंफेक्शन का खतरा काफी ज्यादा होता है. बालरोग विभाग, स्त्रीरोग विभाग, टीबी व चेस्ट रोग विभाग में भी इंफेक्शन का स्तर काफी ज्यादा रहता है. जिससे हर साल सिर्फ मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में ही दर्जनों मौतें होती हैं.

 

कल्चर जांच से जानकारी
दरअसल हॉस्पिटल्स में कई तरह के मरीज आते हैं जोकि अपने साथ कई स्तरों का इंफेक्शन भी लाते हैं. इनमें से टीबी, एचआईवी जैसी बीमारियों का इंफेक्शन भी होता है तो बायो मेडिकल वेस्ट से निकलने वाला इंफेक्शन भी होता है. इसके अलावा लगातार दवाओं के इस्तेमाल से होने वाला इंफेक्शन भी होता है. जिसे समय समय पर चेक किया जाता है. इसके लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉक्टर्स अलग अलग जगहों पर इंफेक्शन के स्तर का कल्चर टेस्ट करते हैं और पता लगाते हैं कि उस जगह पर कितनी तरह के हानिकारक बैक्टीरिया व वायरस हैं. आईसीयू और ओटी में इन्हें हटाने के लिए फ्यूमिगेशन की प्रक्रिया होती है. जबकि हाउस कीपिंग स्टॉफ के जरिए अस्पताल में इंफेक्शन का स्तर कम किया जाता है. इसके लिए हर साल हैलट में ही क्0 से क्ख् लाख रुपए का फिनायल व क्लीनर खरीदा जाता है.

इंफेक्शन के लिए क्क् सदस्यीय कमेटी
प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के आदेश के बाद शुक्रवार को इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी का गठन हुआ. क्क् सदस्यीय इस कमेटी का अध्यक्ष एसआईसी डॉ. आरसी गुप्ता को बनाया गया है. इसके अलावा टीबी चेस्ट विभाग के हेड डॉ. आनंद कुमार को इंफेक्शन कंट्रोल अफसर बनाया गया है. कमेटी में हेड माइक्रोबायोलॉजी विभाग समेत कई विभागों के हेड, मेट्रन व सेनेटरी इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है.

 

फैक्टफाइल-

– क्क् ऑपरेशन थियेटर एलएलआर व अपर इंडिया हॉस्पिटल में

– हैलट व टीबी चेस्ट मिला कर दो आईसीयू

– एक डायलिसिस यूनिट

– ख्भ् बेड का एक एनआईसीयू

– एक हाई डेंसिटी यूनिट

– क्ख् लाख रुपए हर साल क्लीनिंग पर खर्च हैलट में हर साल

– अभी साल में दो से तीन बार आईसीयू व एनआईसीयू का फ्यूमिगेशन

– बर्न यूनिट व मेडिसिन आईसीयू व टीबी चेस्ट आईसीयू में सबसे ज्यादा सेप्टीसीमिया का खतरा

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इंफेक्शन के स्तर की भी जांच
इस संबंध में एलएलआर एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल, प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरसी गुप्ता का कहना है क‍ि अस्पताल में एक इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी का गठन किया गया है. जो यह चेक करेगी कि अस्पताल में इंफेक्शन का स्तर बढ़ने न पाए. इसके लिए हर क्भ् दिन में इंफेक्शन के स्तर की भी जांच की जाएगी.

 

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