कानपुर है दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर

कानपुरः कानपुर में खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है, ऐसा हम नहीं WHO की एक रिपोर्ट कह रही है. WHO की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 15 प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत के ही हैं और इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश का शहर कानपुर सबसे ऊपर है. कानपुर में PM 205 का लेवल 173 मापा गया. कानपुर के नगर निगम विभाग के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं. जब हमने उनसे स्वछता अभियान पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अभी उनके पास इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. वहीं इस सम्बन्ध में आरटीओ विभाग भी कम दोषी नहीं है, जिसका सबसे बड़ा कारण हैं धुंआ देती हुई गाड़िया, जिनपर विभाग कोई ध्यान नहीं देता है.

ये आंकड़े चिंताजनक इसलिए भी हैं कि इसमें ज्यादातर उत्तर भारत के शहर हैं, जिसमें पटना, लखनऊ सहित खासकर यूपी और बिहार के हैं. दिल्ली के अलावा एनसीआर इलाके में आने वाले फरीदाबाद की हालत भी प्रदूषण के मामले में बेहद खराब है.

WHO की ताजा आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में पीएम 2.5 ऐनुल ऐवरेज 143 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है जो नेशनल सेफ स्टैंडर्ड से तीन गुना ज्यादा है. जबकि पीएम 10 ऐवरेज 292 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है जो नेशनल स्टैंडर्ड से 4.5 गुना ज्यादा है. यहां भी ध्यान देने की जरूरत है कि सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) का दावा है कि 2016 के मुकाबले 2017 में दिल्ली की हवा में प्रदूषण के स्तर कम हुआ है.

मालूम हो कि साल 2016 के अंत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकरों ने कई कदम उठाए थे. अक्टूबर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स ऐक्शन प्लान, दिसंबर 2015 में ट्रकों पर इन्वाइरनमेंट कंपनसेशन चार्ज (ईसीसी) और प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनसीआर के शहरों के बीच बेहतर समन्वय जैसे उपाय इनमें शामिल हैं. इन उपायों से कितना फायदा हो पाया है यह WHO की अगली लिस्ट में पता चल पाएगा, क्योंकि यह 2016 का प्रदूषण डाटा है.

प्रदूषण से लड़ने में चीन-पाकिस्तान से पीछे है भारत

WHO की 2010 प्रदूषित शहरों की लिस्ट में दिल्ली टॉप पर तो दूसरे और तीसरे नंबर पर क्रमश: पाकिस्तान का पेशावर और रावलपिंडी था. उस लिस्ट में आगरा भी शामिल था. 2011 की लिस्ट में भी दिल्ली और आगरा थे. 2012 में स्थिति बदलनी शुरू हुई और दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में अकेले भारत के 14 शहर शामिल थे. 2013, 2014 और 2015 में भी दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में भारत के चार से सात शहर शामिल थे.

2016 की लिस्ट में दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 भारत के हैं. 2013 में दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहर में अकेले चीन के पेइचिंग समेत 14 शहर शामिल थे लेकिन वहां प्रदूषण की समस्या पर काबू पाया गया. इसका नतीजा यह सामने आया है कि 2016 में चीन के सिर्फ चार इस लिस्ट में शामिल हैं. जबकि इस लिस्ट में पाकिस्तान और चीन के एक भी शहर नहीं हैं.

जेनेवा, आइएएनएस : वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण आज 10 में से नौ लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। डब्ल्यूएचओ ने वायु प्रदूषण को दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट बताते हुए भारत में चलाई जा रही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की तारीफ की। इस योजना के तहत करीब 3.7 करोड़ों घरों में एलपीजी कनेक्शन पहुंचाया गया है जिससे महिलाएं और बच्चे लकड़ी व कोयले के धुंए में सांस लेने से बच गए हैं। डब्ल्यूएचओ ने अपनी इस रिपोर्ट में 100 देशों के चार हजार शहरों में प्रदूषण के स्तर का ब्योरा दिया है। संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गैबरेसस ने कहा, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है वरना हम स्थायी विकास के लक्ष्य को कभी हासिल नहीं कर सकेंगे।

हर साल 70 लाख लोगों की जाती है जान : प्रदूषण के कारण फेफड़े और हृदय संबंधी बीमारी जैसे स्ट्रोक, कैंसर, निमोनिया आदि के कारण हर साल 70 लाख लोग जान गंवा देते हैं। 2016 में खुले में प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से 42 लाख लोगों की जान गई थी जबकि खाना बनाने के दौरान निकले धुंए में सांस लेने से 38 लाख लोगों की मौत हुई थी। वायु प्रदूषण के कारण होने वाली 90 फीसद मौत एशिया और अफ्रीका के कम व औसत आय वाले देशों में हुईं।

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